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Tuesday, November 15, 2011

बरेली, ध्यान कार्यशाळा, ६-७ नवंबर २०११

परम पूज्य श्री माताजी के निराकार में साक्षात साकार उपस्थित होने का एक चमत्कारिक अनुभव :

श्री माताजी के साकार रूप में उपस्थित होने का प्रमाण हमें बरेली कार्यशाळा में  मिला एक चमत्कारिक  अनुभव से जो की  IVRI  के एक सफाई कर्मचारी ने एक सहज योगी भाई को दूसरे दिन सुबह बतलाया था. उन्हो ने सुबह पंडाल के अंदर झाडू लगlते हुए श्री माताजी के फोटो की ओर इशारा करते हुए प्रश्न किया कि  यह कोन हें तो उन सहजी भाई ने उन्हे बताया कि यह परम पूज्य श्री माताजी है व एक अवतरण है. हम सभी इनकी श्री आदिशक्ति के रूप में पूजा, अर्चना व ध्यान- धारणा करते हें.  उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा कि क्या बात है आप इनके बारे में क्यो जनना चाहते हो?  तो उस ने कहा कि ये कळ रात मेरे सपने में आई थी व उन्होने लाल रंग की साडी पहनी हुई थी. उन्होने मेरे सर पर अपना हाथ ऊपर नीचे करते हुए मुझे कहा कि मै तुमे परमात्मा का अनुभव देने आई हुं व फिर आगे कहा कि मनुष्य का मन एक बंदर के समान है जो इधर उधर भाग दोड करता रहता है . तुम यहा जो मेरा ध्यान का कार्यक्रम हो रहा है उसमे जरूर आना. उसके बाद इनकी आंख खूळ गयी तो उन्होने देखा श्री माताजी उनके सामने साक्षात खडे हुए थे.  वे  श्री माताजी के चरण छूने के लिये जैसे ही उठे  वैसे ही श्री माताजी वहां से अद्रष्य हो गयी . इस चमत्कारिक अनुभव  को सुन  कर सभी का हृदय श्री माताजी के समक्ष नत मस्तक हो गया कि उनका निर्वाज्य प्रेम विराट स्वरूप में सभी को अपने अंlचल में पनाह देता है जो उनको पहचानते हें उनको भी और जो उनको नहीं पहचानते उनको भी .  

 
परम पूज्य श्री आदिशक्ति श्री माताजी के अपार प्रेम की असीम अनुकंपा व आशीर्वाद से बरेली सहज परिवार द्वारा ध्यान  की एक कार्यशाळा का आयोजन ६-७ नवंबर २०११ को भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान  (IVRI ) के प्रांगण में अत्यंत प्रेम पूर्वक व संपूर्ण भक्ति से किया गया . इस कार्यशाळा में बरेली, मोरादाबाद, पिलीभीत, अमोह, लखनऊ, रामपूर, रुद्रपुर, बागपत, चेन्नई, बदायु  व दिल्ली के  सहज योगी सम्मिलित हुए थे.

६  ता. कि सुबह 11 बजे कार्यशाळा का शुभ आरंभ तीन महामन्त्रो के साथ किया गया. श्री माताजी को समर्पित एक पावन सामुहिक स्तुती के साथ ध्यान की शुरुआत की गयी. ध्यान की सर्वप्रथम अवस्था 'निर्विचारिता ',केवळ और केवळ  परम पूज्य श्री माताजी की कृपा से कैसे स्वतः हम प्राप्त कर सकते हें इसका अनुभव करने के लिये सभी ने श्री माताजी के सामने अपने दोनो हाथ किये और हृदय से प्रार्थना अर्पित  की. इस प्रार्थना के साथ साथ सभी ने अपने हृदय  में श्री माताजी से इच्छा भी व्यक्त की कि - श्री माताजी कृपया हमें निर्विचारिता प्रदान कीजिये. परम पूज्य श्री माताजी के आशीर्वाद से जैसे जैसे परम चैतन्य का प्रवाह बहना शुरू हो गया सभी निर्विचारिता के  आत्मानंद  व आत्मिक शांती के सागर की सुंदर व अद्भुत स्थिती को अनुभव करने लगे.  इस आनंद को और प्रगाढ करने के लिये श्री माताजी की आराधना में स्तुती गायी गयी व उनके कई प्रवचनो के अंशो को सभी ने पूर्ण एकाग्रता से सुना और आत्मसात किया.
इस तऱ्ह से यह अनुभव  किया गया की हमारे और श्री माताजी के बीच में हमें किसी अन्य व्यक्ति को लाने की आवश्यकता नहीं हें. श्री माताजी से सीधे हमें प्रार्थना करनी चाहिये और अत्यंत सहजता से अनायास ही हमें उनके आशीर्वाद स्वरूप निर्विचारिता प्राप्त होती है जिसके फलस्वरूप हमारा कल्याण होता है जैसा की परम पूज्य श्री माताजी की दिव्य वाणी में उनके अनेको प्रवचनो में श्री माताजी ने हमें बताया हुआ है . ध्यान की इस अत्यंत सुंदर निर्विचार अवस्था में सभी ने श्री माताजी से प्रार्थना की कि -श्री माताजी आप सर्व विद्यमान हें - कृपया हमें आकाश तत्व में सर्व व्याप्त आपकी दिव्य शक्ति का अनुभव प्रदान कीजिये. इस प्रार्थना के साथ सभी ने अपने हाथ आकाश की ओर किये और अनुभव  किया कि श्री माताजी के चैतन्य का प्रवाह अत्यंत सुंदरता से जोर से आना आरंभ होने लगा और निर्विचारिता भी स्वतः बढ गयी. परम पूज्य श्री माताजी के इस असीम प्रेम की एक और प्रचीती पाने के लिये सभी ने एक साथ अपना बायां हाथ फोटो की ओर किया और सीधे हाथ से जैसे बंधन देते है उसी प्रकार करते हुए यह  पाया कि जैसे जैसे हाथ ऊपर की ओर ले जाते थे  वैसे वैसे ही श्री माताजी की शक्तिओ  का सुंदर प्रवाह हम अपने नस नाडीयो पर स्वतः अनुभव करने लगते थे. परम पूज्य श्री माताजी के चमत्कारिक शक्तिओ की  यह एक अत्यंत ही सुंदर प्रचीती थी. यह परम  पूज्य श्री माताजी के अविरल प्रेम का एक अविस्मरणीय प्रत्यक्ष  प्रमाण था.
उसके उपरांत उपस्थित सामुहिकता ने परम पूज्य श्री माताजी को दोपहर का भोजन समर्पित करते  हुए श्री अन्नपूर्णा का मंत्र लिया व उसके बाद सभी ने पारस्पारिक प्रेम व आनंद के सुंदर वातावरण में दोपहर का भोजन किया जिसे की बरेली सामुहिकता ने अत्यंत प्रेम से अपने सभी भाईयो व बहनो के लिये बनवाया था व स्वयं सब को परोसा.
दोपहर के भोजन के बाद सभी ने अपने प्रत्येक चक्र को केवळ श्री माताजी के महामंत्र स्वरूप नाम,  जो कि "श्री माताजी"  है व जिसमे सारी शक्तिया समाहित है, से निर्मल  करने का साक्षात अनुभव लिया.  उसके लिये सभी ने अपना बायां हाथ फोटो की ओर किया व सीधा हाथ अपने चक्रो पर एक एक कर रखा व ह्रदय में श्री माताजी को प्रेम से स्मरण करते हुए प्रार्थना की कि श्री माताजी केवळ आप की ही कृपा व प्रेम की शक्ति से हमारा चक्र चमत्कारिक रूप से निर्मल व जाग्रत होता है कृपया हमारे चक्र निर्मल कर दीजिये. ऐसा करते ही सभी ने यह अनुभव किया कि परम पूज्य श्री माताजी निराकार में उस स्थान में पूर्ण साकार रूप में विराजमान थी व परम चैतन्य की सुखद अनुभूती अभूतपूर्व थी  एवं श्री माताजी से संपूर्ण एकाकरिता स्थापित होती प्रतीत हो रही थी. श्री माताजी व उनके शिष्यो के बीच में कोई भी नहीं था.
४ बजे सायं काल के चाय के अंतराळ के बाद पुनः सब एकत्रित हुए व ध्यान से संबंधित सामुहिक प्रश्नो पर पारस्पारिक विचlरो का आदान प्रदान किया गया तथा एक बार फिर से श्री माताजी के ध्यान की सुंदर अवस्था में प्रथम दिवस के अंत में एक आनंदमय उल्लाहास के साथ में रात्री का भोजन सब ने ग्रहण किया. 

दूसरे दिन ७ ता. को सुबह १०.३० बजे  सब पुनः एकत्रित हुए व प्रथम दिन के ध्यान के अविस्मरणीय अनुभव को पुनः पाने के लिये श्री माताजी से सभी ने हृदय से प्रार्थना की और जैसl श्री माताजी ने बताया हुआ है कोई भी प्रयास करने की आवश्यकता नहीं है बस हमे केवळ उनकी ओर हाथ करने है और श्री माताजी  के परम चैतन्य का अनुभव हमारे संपूर्ण नाडी तंत्र पर स्वयं प्राप्त होने लगता है.  इसे सभी ने अत्यंत प्रेम पूर्वक अनुभव किया . श्री माताजी कि प्रेम की शक्ति  से हम अपनी दैनिक जीवन की हर छोटी या बडी से बडी समस्याओ से  कैसे मुक्त हो  सकते हें इसका अनुभव प्राप्त करने के लिये सभी ने अपने हाथ श्री माताजी की ओर 
करके संपूर्ण निर्विचारिता में अपनी समस्याए    श्री माताजी के संमुख रखी व प्रार्थना की कि
-श्री माताजी हम आपके चरणो पर सब छोडते हें अब आप जैसे चाहे जब चाहे निदान कर दीजिये हमें सब स्वीकार्य है . जैसे ही सब ने इस प्रकार धीरे धीरे श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की निर्विचारिता का आनंद स्वतः और बढ गया व इस आनंद की अभूतपूर्व स्थिती में सभी श्री माताजी की भक्ति में लीन हो गये. सभी  को स्पष्ट अनुभ  हुकि श्री माताजी ने सभी की समस्याए अपने अंदर समाहित करके हमें हमारी  चिंता  के भार से मुक्त कर दिया. इसके बाद कुछ भाई व बहने श्री माताजी के सामने बैठे व सभी ने हाथ आगे करके उनको चैतन्य दिया व इसका अनुभव किया कि बाया हाथ जो श्री माताजी की ओर था वहा से चैतन्य आ रहा था व दाहिना हाथ जो सामने बैठे व्यक्ति की ओर था उससे निकल कर उनकी ओर जा रहा था. इस प्रकार सामने बैठे व्यक्ति को श्री माताजी की परम शक्तिओ का आनंद प्राप्त हो रहा था.  केवळ श्री माताजी के ध्यान से प्राप्त इन दो दिनो के श्री माताजी  की प्रेम की शक्तिओ का अपने सुंदर सुंदर अनुभवो का वर्णन इसके बाद कई बहनो व भाईयो ने सभी को सुनाया.

४ बजे  भोजन के उपरांत श्री माताजी की कुछ पावन स्तुतिया युवा शक्ति द्वारा श्री माताजी को अर्पित की गयी तथा उसके बाद
रात्री में पुनः श्री माताजी के ध्यान के  उपरांत कार्यक्रम को श्री माताजी की अति पावन आरती के साथ संपन्न किया गया. 


 श्री माताजी के अनंत आशीर्वाद स्वरूप इस अविस्मरणीय उनके दिव्य प्रेमानुभव के लिये हम सभी परम पूज्य श्री माताजी को कोटी कोटी नमन करते है .

जय श्री माताजी 

फोटोग्राफ लिंक : https://picasaweb.google.com/104065791801321577474/OLfoI?authuser=0&feat=directlink


EXPERIENCES/ FEED BACK : 
From: sunil rastogi <guddoo_123@rediffmail.com>
Date: Sat, Nov 12, 2011 at 2:06 PM
Subject: Bareilly ke Anubhav

Jai Shri Mata ji,
jab se  bareilly mei workshop attend kiya hai
maa ka dhyan karna bahut hi accha lagta hai aur asaani
se chaitany ki barish hoti hai . maan ki itni kripa
phele kabhi prapt nahi hui.mejhe yeh nahi pata ki mera
dhyaan kitna lagata hai but Maa ke samne baithne mein
apoorv anand aata hai.
ak baar phir Shri Mataji ka dhanyawad karta hoon jisse ki Maa
ki kripa sulabhta se praapt ho jaati hai.
Jai Shri Mata ji

Sunil Rastogi
moblie no.9412189639

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